" दहेज़ प्रथा"
दहेज़ प्रथा, यह शब्द् सुनते ही हमारे दिमाग में एक ऐसा चित्र बनता है,जो एक लाचार पिता अपनी बेटी के लिए वर पक्ष के पिता के पैरो में गिरा है।
आज भारत में तकरीबन हर राज्य में 'दहेज़ प्रथा' प्रचलित है,दहेज़ हमारे समाज के लिए अभिसाप है, लेकिन अभी भी समाज में कुछ लोग जो पुराणी मानशिकता के साथ रह रहे है,उन्हें और जागरूक करने की आवश्यकता है।
आज हमारे समाज में जब लडकिया शाद्दी करके जाती है,तो वो किस तरह प्रताड़ित होती है।इस से हम सब वाकिफ है,लडकिया को इतना परेशान किया जाता है,की कभी कभी तो लडकिया आत्महत्या कर लेती है।और फिर भी समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता है। समाज तमाशबीन बना रहता है।
ऐसा नहीं है की दहेज़ प्रथा के लिए सरकार ने कानूम नहीं बनाया है, हमारे यहाँ कड़े कानून है। फिर भी यह मानशिकता ऐसे हे चल रही है।
दहेज़ प्रथा को रोकने के लिए हमें आगे बढ़कर लोगो को जागरूक करना चाहिए,और नक्कड़ नाटक और मानव सृंखला के माध्यम से लोगो की मानशिकता को बदलनी चाहिए। और दहेज़ को ना कहना चाहिये हमेसा के लिए।
Amit kumar
( अमित कुमार)
पटना।
दहेज़ प्रथा, यह शब्द् सुनते ही हमारे दिमाग में एक ऐसा चित्र बनता है,जो एक लाचार पिता अपनी बेटी के लिए वर पक्ष के पिता के पैरो में गिरा है।
आज भारत में तकरीबन हर राज्य में 'दहेज़ प्रथा' प्रचलित है,दहेज़ हमारे समाज के लिए अभिसाप है, लेकिन अभी भी समाज में कुछ लोग जो पुराणी मानशिकता के साथ रह रहे है,उन्हें और जागरूक करने की आवश्यकता है।
आज हमारे समाज में जब लडकिया शाद्दी करके जाती है,तो वो किस तरह प्रताड़ित होती है।इस से हम सब वाकिफ है,लडकिया को इतना परेशान किया जाता है,की कभी कभी तो लडकिया आत्महत्या कर लेती है।और फिर भी समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता है। समाज तमाशबीन बना रहता है।
ऐसा नहीं है की दहेज़ प्रथा के लिए सरकार ने कानूम नहीं बनाया है, हमारे यहाँ कड़े कानून है। फिर भी यह मानशिकता ऐसे हे चल रही है।
दहेज़ प्रथा को रोकने के लिए हमें आगे बढ़कर लोगो को जागरूक करना चाहिए,और नक्कड़ नाटक और मानव सृंखला के माध्यम से लोगो की मानशिकता को बदलनी चाहिए। और दहेज़ को ना कहना चाहिये हमेसा के लिए।
Amit kumar
( अमित कुमार)
पटना।
बहुत खूब |
ReplyDeleteबहुत खूब |
ReplyDeleteSukriya
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