“SURNAME” की लड़ाई”
Surname जी हां,यू तो एक बहुत ही आम शब्द, जो हमारे बीच वर्षो
से चला आ रहा, surname को हम उपनाम से भी संबोधित करते है|भारत की
इतिहास में देखे तो काफी समय से उपनाम रखने की प्रचालन चलती आ रही है. उपनाम हमारे
नाम के ठीक बाद लगाया जानेवाला नाम है, जो शायद हमारे पुराने ईतिहास की एक छवि के तौर पर भी प्रदर्शित करती है|आज की बात करे
तो, आज हमारे समाज में उपनाम की होर मची है,समाज के हर वर्ग से लेकर धर्म जाति के
अनुशार लोग उपनाम का चयन करते है| जो कहीं न कहीं उनके इतिहाश को भी प्रदर्शित
करती है, अगर भारतीय राजनीति की बात करे तो भारत के राजनीति में उपनाम का बहुत
महत्व है, उपनाम देख कर लोग अपनी वोट बैंक देखते है|
अगर सामाजिक दृष्टिकोण से देखे तो उपनाम हमारे समाज को विभाजित की ओर ले जा रहा है|आज उपनाम के वजह से लोगो
में एक जलन दृष्टि की भावना भी आ गयी है,ये जानकर की उपनाम का इतिहास कितना “मजबूत” था या “कमज़ोर” , उपनाम से इनकी जातियों और धर्म पे भी पूरा असर होता है, जो की एक बड़ी वजह
है, लोगो में इर्ष्या का आना, अगर यह उपनाम न हो, तो शायद हमारे समाज से लोगो की
मानशिकता में बदलाव होगा|और लोग सबको एक नज़र में देखेंगे |