रंग भेद
रंग भेद, जी हां, सुनने में तो यह शब्द कोई खाश मायने नहीं रखता.परन्तु इस
शब्द की गहराई बहुत ज्यादा है,यू तो भगवान द्वारा बने गयी हर रंग सर्वोपरी है,लेकिन
जब हम अपने समाज मे देखे, तो यह बिलकुल अलग लगता है,
एक और जहाँ गोरे रंग की अहमियत है,वही हमारे समाज में इसके विपरीत रंग
को लोग बहुत ही नीच दृष्टि से देखते है| भारत की बात करे तो यहाँ भी गोरे रंग की प्राथिमिकता
दी जाती है,लेकिन अफरीकाई देशो में काले रंग के अह्मियात्ता ज्यादा है,
आये दिन रंग भेद के कारण
लोगो में भेदभाव हीन भावना भी पनपने लगी है|जिस कारण समाज का खाश वर्ग भी प्रभावित
हो रहा है|आज भारत में जब भी शाद्दी के बात होती है,तो लोग गोरे रंग को ही अहमियत
देते है|जिस कारण आये दिन लड़के लडकियों के शाद्दी भी टूट जाती है,इस कारण हमारा
समाज दो भागो में बांट गया है,“गोरा” और “कला”|
हमें,
यह होना चाहिए की हम समाज और यहाँ रहने वालो को एक नज़र से ही देखे, और इस सामाजिक कुरीतियों
को ख़तम करे और रंग भेद बंद करे|
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